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Grievance Redressal Officer एस्केलेशन

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To,
The Grievance Redressal Officer


Date:

Subject: Grievance — unresolved billing dispute, Bill No. , Patient , Patient ID 

Dear Sir/Madam,

I am filing a formal grievance regarding overcharging in the above bill.

On , I sent a written dispute to your billing department (copy enclosed), delivered by on , identifying specific problems in the bill totalling Rs. . The dispute covered medicines or devices charged above their printed MRP or ceiling price. It covered procedure or test charges far above government benchmark rates. It covered items billed more than once. It covered items billed but never received. It covered doctor visits billed in excess of those that took place. It covered separate charges for items already included in the room or procedure rate. It covered charges added on top of an agreed all-inclusive package. It covered lump-sum entries with no break-up. It also covered further discrepancies described in that letter. I requested a written, item-wise response within 7 days.

The Charter of Patients' Rights requires every hospital to run a time-bound grievance redressal mechanism and keep a record of every grievance and the action taken on it. I am using that mechanism now.

I request that you:

  1. Register this grievance and provide me its registration number.
  2. Provide a written response addressing each disputed item, with a clear resolution timeline, within 15 days.
  3. Confirm the remedial action taken, including refund of the excess amount of Rs. .

If this grievance is not resolved within 15 days, I will take it to the district registering authority and the District Consumer Commission.

Thank you,




Enclosures: dispute letter with proof of delivery, itemised bill, benchmark rate evidence, hospital's reply (if any).

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How to use this letter

यह पत्र क्या करता है

यह आपके बिलिंग विवाद को बिलिंग काउंटर से उठाकर अस्पताल के Grievance Redressal Officer तक औपचारिक रूप से ले जाता है — वह भीतरी कदम जो उपभोक्ता फोरम या जिला पंजीकरण प्राधिकरण के पास जाने से पहले आम तौर पर पूरा करना होता है।

इसका क्या करें

  1. 2 कॉपी प्रिंट करें और दोनों पर दस्तखत करें। टेम्पलेट 2 का पत्र, उसके पहुंचने का सबूत, और अस्पताल का जवाब (अगर आया हो) साथ लगाएं। इसी डिवाइस पर टेम्पलेट 2 भरा था तो वहां चुनी समस्याएं यहां अपने-आप आ जाती हैं।
  2. अस्पताल में या उनकी वेबसाइट पर दिए Grievance Redressal Officer के पते पर ईमेल करें।
  3. हो सके तो ग्रीवांस अधिकारी के डेस्क पर हार्ड कॉपी दें; अपनी दूसरी कॉपी पर तारीख और रजिस्ट्रेशन नंबर वाली मोहर लगवाएं।
  4. कागजी रिकॉर्ड पूरा रखने के लिए रजिस्टर्ड AD डाक से अस्पताल के रजिस्टर्ड पते पर भी भेजें।
  5. किसने और कब लिया, नोट कर लें। 15 दिन की समयसीमा डायरी में लिखें।

आपसे पूछे जा सकने वाले सवाल

“बिलिंग विभाग पहले से इसे देख रहा है।”
“उन्हें दिए 7 दिन बीत चुके हैं। चार्टर के अधिकार (xix) के तहत यह अगला कदम है — कृपया ग्रीवांस दर्ज करें।”
“हमारे यहां Grievance Redressal Officer नहीं है।”
“हर क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट को एक नियुक्त करना जरूरी है। कृपया इसे लेकर जिम्मेदार व्यक्ति तक पहुंचाएं। मैं नोट करूंगा कि किसी अधिकारी का नाम नहीं दिया गया।”
“डॉक्टर / अकाउंट्स हेड के साथ आइए।”
“ग्रीवांस एक लिखित रिकॉर्ड है। कृपया अभी स्वीकार करें और मोहर लगी पावती दें; जवाब बाद में अलग से आ सकता है।”
“पंद्रह दिन काफी नहीं हैं।”
“चार्टर समयबद्ध व्यवस्था मांगता है। ज्यादा समय चाहिए तो कारण के साथ लिखित में बता दीजिए।”

शांत रहें, रिकॉर्ड रखें

  • विनम्र और तथ्यों पर टिके रहें — अधिकारी लिखित रिकॉर्ड तक पहुंचने का रास्ता है, बहस का व्यक्ति नहीं।
  • अस्पताल में Grievance Redressal Officer का नाम और संपर्क नहीं लगा था, तो ऊपर “Edit letter wording” से यह बताती एक छोटी लाइन जोड़ें — रिकॉर्ड मजबूत होता है।
  • 15 दिन में जवाब नहीं, या अधूरा जवाब? अगले कदम हैं Clinical Establishments Act के तहत जिला पंजीकरण प्राधिकरण और जिला उपभोक्ता आयोग (billokay.com/templates पर टेम्पलेट 7)।
Before you send

पत्र अंग्रेजी में है — भारत भर के अस्पताल और सरकारी विभाग अंग्रेजी पत्राचार स्वीकार करते हैं।

साथ लगाएं: टेम्पलेट 2 के विवाद पत्र की कॉपी और पहुंचने का सबूत (ईमेल ट्रेल, WhatsApp स्क्रीनशॉट, या डाक रसीद), अस्पताल का जवाब (अगर आया हो), और वही आइटमाइज्ड बिल व बेंचमार्क सबूत जो विवाद पत्र में लगाए थे।

कैसे भेजें: अस्पताल के नोटिस बोर्ड या वेबसाइट पर दिए Grievance Redressal Officer के पते पर ईमेल करें, और हो सके तो ग्रीवांस अधिकारी के डेस्क पर मोहर लगवाकर हार्ड कॉपी दें। पूरा कागजी रिकॉर्ड चाहिए तो रजिस्टर्ड AD डाक से अस्पताल के रजिस्टर्ड पते पर भी भेजें।

यह पत्र कब चाहिए

जब अस्पताल के बिलिंग विभाग ने आपके लिखित विवाद को अनसुना कर दिया हो या आपके उठाए आइटमों पर बात किए बिना जवाब दे दिया हो, और उस विवाद पत्र की 7 दिन की समयसीमा बीत चुकी हो — तब यह पत्र इस्तेमाल करें। यह बिलिंग काउंटर के साथ एक और चक्कर नहीं है — यह उस व्यक्ति तक औपचारिक एस्केलेशन है जिसे अस्पताल को मरीजों की शिकायतें संभालने के लिए नामित करना जरूरी है। Clinical Establishments Act 2010 के तहत मंजूर मरीज अधिकार चार्टर हर अस्पताल से समयबद्ध ग्रीवांस व्यवस्था चलाने और हर शिकायत व कार्रवाई का लिखित रिकॉर्ड रखने की मांग करता है।

अस्पताल की अपनी ग्रीवांस व्यवस्था से गुजरना सिर्फ रस्म नहीं है — यह आगे के हर कदम को मजबूत करता है। जिला पंजीकरण प्राधिकरण, जिला उपभोक्ता आयोग, और नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन — सब यह देखते हैं कि मरीज ने पहले अस्पताल से मामला सुलझाने की कोशिश की या नहीं। यह पत्र वही रिकॉर्ड बनाता है।

भेजने के बाद क्या होता है

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अस्पताल का Grievance Redressal Officer क्या होता है?

Grievance Redressal Officer वह व्यक्ति है जिसे अस्पताल को मरीजों की शिकायतें — बिलिंग विवाद समेत — संभालने के लिए नामित करना जरूरी है। Clinical Establishments Act 2010 के तहत मंजूर मरीज अधिकार चार्टर हर अस्पताल से समयबद्ध ग्रीवांस व्यवस्था चलाने और हर शिकायत व उस पर हुई कार्रवाई का लिखित रिकॉर्ड रखने की मांग करता है। उपभोक्ता फोरम या जिला पंजीकरण प्राधिकरण के पास जाने से पहले आम तौर पर यह भीतरी कदम पूरा करना होता है।

Grievance Officer का नाम और संपर्क कैसे पता करें?

अधिकारी का नाम, पद, और संपर्क साफ दिखने वाली जगह लगा होना जरूरी है — आमतौर पर रिसेप्शन के नोटिस बोर्ड, बिलिंग काउंटर, मरीज अधिकार पोस्टर, और अस्पताल की वेबसाइट पर। कहीं न मिले, तो अस्पताल खुद चार्टर की चूक में है, और यह चूक भी रिकॉर्ड में डालने लायक है। ऊपर “Edit letter wording” से एक छोटी लाइन जोड़ें कि अधिकारी का ब्योरा कहीं नहीं लगा था — अगले कदम के लिए आपकी फाइल मजबूत होती है।

जवाब के लिए कितना समय दें?

पत्र 15 दिन में लिखित जवाब मांगता है। यह समय पत्र में ही लिखा है और अस्पताल को पत्र मिलने की तारीख से शुरू होता है। जिस दिन भेजें, उसी दिन समयसीमा डायरी में नोट कर लें। 15 दिन बीत जाएं और कोई जवाब न आए, या जवाब विवादित आइटमों पर बात ही न करे, तो जिला पंजीकरण प्राधिकरण और जिला उपभोक्ता आयोग की ओर बढ़ें।

अस्पताल में Grievance Officer है ही नहीं तो?

वही पत्र Medical Superintendent या Hospital Administrator के नाम करें और रजिस्टर्ड AD डाक से भेजें। एक लाइन जोड़ें कि कोई Grievance Redressal Officer नियुक्त या प्रदर्शित नहीं है — यह कमी खुद Clinical Establishments Act का उल्लंघन है और जिला पंजीकरण प्राधिकरण व उपभोक्ता आयोग के सामने आपका रिकॉर्ड मजबूत करती है।

एस्केलेशन की सीढ़ी